जननायक कर्पूरी ठाकुर रत्न सम्मान: रामदास ठाकुर के संघर्ष की गाथा
प्रस्तावना: समाज सेवा और जन-चेतना का प्रतीक भारतीय समाज का इतिहास ऐसे अनगिनत संतों, विचारकों और समाजसेवियों के योगदान से समृद्ध रहा है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शोषित, पीड़ित और पिछड़े वर्गों के उत्थान में समर्पित कर दिया। ऐसे ही व्यक्तित्व किसी परिचय या औपचारिक प्रशंसा के मोहताज नहीं होते; उनका काम ही उनकी पहचान बन जाता है। बिहार की पावन धारा, विशेषकर बेगूसराय की माटी ने समय-समय पर ऐसे वीरों और समाज सुधारकों को जन्म दिया है जिन्होंने सामाजिक विषमता के खिलाफ आवाज़ उठाई। इसी श्रृंखला में श्री रामदास ठाकुर जी का नाम बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। ग्राम सीहमा (जिला बेगूसराय) के निवासी, स्व० घिनावन ठाकुर एवं स्व० धनेश्वरी देवी के पुत्र श्री रामदास ठाकुर जी का जीवन नाई समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण जन-सामान्य के अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई का जीवंत दस्तावेज़ है। हाल ही में समस्तीपुर जिले के नया टोला में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें 'जननायक कर्पूरी ठाकुर रत्न सम्मान' से अलंकृत किया गया। यह विशेष लेख इस ऐतिहासिक अवसर पर श्री राम लखन शर्मा जी (अध्यक्ष, बाबा धर्मदास जन स...