रामलखन भाई: समाज सेवा में तपकर कुंदन बना जीवन
रामलखन भाई: समाज सेवा की आग में तपकर कुंदन बना एक समर्पित जीवन कहते हैं कि नदी का पानी जब अपने पूरे वेग से बहता है, तो रास्ते की बड़ी से बड़ी चट्टानें भी उसे रोक नहीं पातीं। वह बस अपनी राह बदल लेता है, लेकिन उसकी गति कभी नहीं ठहरती। इंसानी जिंदगी भी ठीक उसी बहते हुए जल की तरह है—अनवरत, जीवंत और गतिमान। जब इस जीवन की राह में मुश्किलें, सामाजिक चुनौतियाँ और विपदाएँ आती हैं, तो साधारण मनुष्य ठहर जाता है, लेकिन एक दृढ़ संकल्पी पुरुष उनसे हार नहीं मानता। वह अपने ‘अनुभव’ के पतवार से अपनी जीवन-नाव को एक नई दिशा दे देता है और दूसरों के लिए मार्गदर्शक बनता है। बेगूसराय के बदनपुरा ग्राम की धरती से जब मैं, चुनचुन ठाकुर (मुखिया), अपने मित्र भाई रामलखन शर्मा जी के जीवन और उनके सफर को देखता हूँ, तो मेरा अंतर्मन गहरे आदर, अपनत्व और एक अजीब सी वैचारिक कशमकश से भर जाता है। रामलखन भाई, जो लखीसराय जिला संयोजक होने के साथ-साथ बाबा धर्मदास जन सेवा संघ के भी संयोजक हैं, उन्होंने कभी किसी साधारण ढर्रे पर या सिर्फ अपने लिए जिंदगी नहीं जी। उन्होंने अपने पूरे जीवन को नाई समाज की सेवा, उनके अधिकारों की रक्षा और ...