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रामलखन भाई: समाज सेवा में तपकर कुंदन बना जीवन

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रामलखन भाई: समाज सेवा की आग में तपकर कुंदन बना एक समर्पित जीवन कहते हैं कि नदी का पानी जब अपने पूरे वेग से बहता है, तो रास्ते की बड़ी से बड़ी चट्टानें भी उसे रोक नहीं पातीं। वह बस अपनी राह बदल लेता है, लेकिन उसकी गति कभी नहीं ठहरती। इंसानी जिंदगी भी ठीक उसी बहते हुए जल की तरह है—अनवरत, जीवंत और गतिमान। जब इस जीवन की राह में मुश्किलें, सामाजिक चुनौतियाँ और विपदाएँ आती हैं, तो साधारण मनुष्य ठहर जाता है, लेकिन एक दृढ़ संकल्पी पुरुष उनसे हार नहीं मानता। वह अपने ‘अनुभव’ के पतवार से अपनी जीवन-नाव को एक नई दिशा दे देता है और दूसरों के लिए मार्गदर्शक बनता है। बेगूसराय के बदनपुरा ग्राम की धरती से जब मैं, चुनचुन ठाकुर (मुखिया), अपने मित्र भाई रामलखन शर्मा जी के जीवन और उनके सफर को देखता हूँ, तो मेरा अंतर्मन गहरे आदर, अपनत्व और एक अजीब सी वैचारिक कशमकश से भर जाता है। रामलखन भाई, जो लखीसराय जिला संयोजक होने के साथ-साथ बाबा धर्मदास जन सेवा संघ के भी संयोजक हैं, उन्होंने कभी किसी साधारण ढर्रे पर या सिर्फ अपने लिए जिंदगी नहीं जी। उन्होंने अपने पूरे जीवन को नाई समाज की सेवा, उनके अधिकारों की रक्षा और ...

बिहार दिवस पर अनमोल भाषण: एक छात्र की प्रेरक कहानी

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प्रतीकात्मक चित्र बचपन की यादें भी कमाल की होती हैं। धूल-मिट्टी से सने वो दिन और छोटी-छोटी चीजों में छुपी खुशियां, आज भी जब ज़हन में तैरती हैं, तो चेहरे पर एक अनजानी सी मुस्कान छोड़ जाती हैं। अनमोल के बचपन का वो दौर भी कुछ ऐसा ही था, जहाँ हर शाम एक नया खेल होता था और हर खेल का अपना एक अलग ही संसार था। गाँव की उस मिट्टी में एक अजीब सा सुकून था। बरसात के दिनों में जब चारों तरफ हरियाली छा जाती, तो खेतों के किनारे एक पौधा उगता था, जिसे सब स्थानीय भाषा में 'पेक्चा' कहते थे। पेक्चा का पत्ता आकार में काफी बड़ा और बिल्कुल गोल होता था। बच्चों के लिए वह पत्ता किसी जादुई थाली से कम नहीं था। शाम ढलते ही बच्चों की टोली जुट जाती और शुरू होता था 'झूठा-मूठा' का काल्पनिक खाना बनाने का खेल। कोई छोटी-छोटी सूखी लकड़ियां तोड़कर लाता और कहता, "लो, मैं जलावन लेकर आ गया।" कोई मिट्टी और पत्थरों को जोड़कर छोटा सा चूल्हा बनाता। फिर उस पेक्चा के बड़े और गोल पत्ते पर काल्पनिक पकवान परोसे जाते और सब मिलकर बड़ी मासूमियत से उसे एक-दूसरे में बांटते थे। उस पत्ते की एक और खासियत थी जो बच्चों को...

मनीषी रामलखन शर्मा: मन में विद्रोह, हाथों में क्रांति

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हाशिये पर खड़े समाज का सच्चा रहनुमा: रामलखन जी से एक आत्मीय मुलाकात हमारा समाज अक्सर उन चेहरों को याद रखता है जो अखबारों के मुख्य पृष्ठों पर चमकते हैं या जो बड़बोलेपन के साथ मंचों पर ऊँचे नारे लगाते हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत का तजुर्बा रखने वाला हर व्यक्ति यह भली-भांति जानता है कि समाज की असली बुनियाद उन गुमनाम संतों, कर्मठ कार्यकर्ताओं और निश्छल समाजसेवियों के कंधों पर टिकी होती है, जो बिना किसी राजकीय सम्मान या प्रचार की लालसा के अपना पूरा जीवन लोगों के आंसू पोंछने में खपा देते हैं। मैं रामविलास पासवान, ग्राम-सैदपुरा, सूर्यगढ़ा, जिला-लखीसराय का मूल निवासी हूँ। वर्तमान में सूर्यगढ़ा थाना में दफादार के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहा हूँ, और इसके साथ ही साथियों के विश्वास की बदौलत दफादार चौकीदार जिला संघ लखीसराय के अध्यक्ष पद का दायित्व तथा बिहार प्रांत के प्रांतीय उपाध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी भी संभाल रहा हूँ। समाज सेवा के इस कटीले मार्ग पर चलते हुए रोज़ नए अनुभव होते हैं, और सच कहूँ तो अपनी ही सेवा-भावना या संघर्षों का स्वयं अपने मुख से ज़िक्र करना मैं कतई उचित नहीं समझता। यह संस्कारों के खिलाफ...

Zero Balance Account के हिडन चार्ज की सच्चाई

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डिजिटल बैंकिंग की चमक और अदृश्य शर्तें: एक आम उपभोक्ता का कड़वा सच और सबक आज का युग डिजिटल युग है। स्मार्टफोन के एक क्लिक पर बैंक खाता खुल जाना, "जीरो बैलेंस" (Zero Balance) के लुभावने विज्ञापन और "नो ऐडेड चार्जेस" के बड़े-बड़े वादे—यह सब एक आम उपभोक्ता को बहुत आकर्षित करते हैं। हममें से अधिकांश लोग इन विज्ञापनों पर भरोसा करके डिजिटल बैंकिंग की ओर कदम बढ़ा देते हैं। लेकिन क्या यह चमक वाकई उतनी ही सच है जितनी दिखाई देती है? या फिर इन लुभावने वादों के पीछे नियमों और शर्तों (Terms & Conditions) की एक ऐसी भूलभुलैया होती है, जिसमें फंसकर एक आम इंसान खुद को ठगा हुआ महसूस करता है? हाल ही में मुझे एक डिजिटल सेविंग्स अकाउंट के साथ बिल्कुल ऐसा ही व्यावहारिक अनुभव हुआ। यह लेख किसी संस्था को बदनाम करने के लिए नहीं, बल्कि अपने उसी 3 साल लंबे अनुभव के उतार-चढ़ाव, तकनीकी बारीकियों और डिजिटल सुरक्षा के उन पाठों को साझा करने के लिए है, जो हर इंटरनेट यूजर को जानने चाहिए। डिजिटल प्राइवेसी और 'परमिशन' (Permissions) का मनोविज्ञान जब हम कोई भी मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन डाउनलोड ...

रामलखन शर्मा के लोकगीत और सामाजिक भलाई का संदेश

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प्रतीकात्मक चित्र विरासत का अंकुरण और चेतना का शंखनाद: रामलखन शर्मा की सामाजिक पुकार इस संसार में मनुष्य का जीवन केवल सांसें लेने और व्यक्तिगत तरक्की पा लेने का नाम नहीं है। कुछ आत्माएं ऐसी होती हैं, जिनके भीतर समाज की पीड़ा को हरने का जज्बा किसी आकस्मिक घटना से नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिले संस्कारों की समृद्ध मिट्टी से उपजता है। जब बचपन की कोमल आंखें अपने ही घर में निस्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण देखती हैं, तो वह भावना व्यक्तित्व की गहराइयों में इस कदर समा जाती है कि जीवन का एकमात्र उद्देश्य ही लोक-कल्याण बन जाता है। लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा अंतर्गत ग्राम-पोस्ट 'चननियाँ' के स्थाई निवासी रामलखन शर्मा एक ऐसी ही तपस्वी शख्सियत हैं, जिन्होंने अपनी पारिवारिक विरासत को समाज के उत्थान का जरिया बना दिया। पूज्य पिता की विरासत और सेवा का अंकुर रामलखन बाबू का यह लेख केवल एक संस्मरण नहीं, बल्कि अपने पुरखों के प्रति कृतज्ञता की एक अनमोल अभिव्यक्ति है। वे अत्यंत आदर और गर्व से कहते हैं कि वे अपने पूज्य पिता स्वर्गीय लालजी ठाकुर जी के छोटे पुत्र हैं। स्वर्गीय लालजी ठाकुर जी अपने स्वजातीय ...

कौन हैं रामलखन शर्मा, जिन्हें मिला 'कर्पूरी ठाकुर रत्न' सम्मान?

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प्रतीकात्मक चित्र सेवा, समर्पण और सम्मान की एक अमर सांझ: जब कर्म को मिला 'रत्न' सम्मान समाज में जब भी बदलाव की कोई मद्धम सी बयार चलती है, तो उसके पीछे किसी एक इंसान की बरसों की खामोश तपस्या होती है। कुछ लोग इतिहास के पन्नों पर सिर्फ नाम दर्ज कराने के लिए नहीं जीते, बल्कि वे दूसरों के जीवन में उजाला भरने के लिए खुद को मोमबत्ती की तरह जला देते हैं। बिहार की पावन धरती ने ऐसे कई मनीषियों को जनम दिया है, जिन्होंने महलों की सुख-सुविधाओं को छोड़कर झोपड़ियों में रहने वाले इंसानों के आंसुओं को पोंछना अपना धर्म समझा। ऐसे ही एक महामानव थे जननायक कर्पूरी ठाकुर जी, जिनके संघर्षों की गूंज आज भी बिहार के जर्रे-जर्रे में सुनाई देती है। और जब उन्हीं जननायक की याद में सजी कोई महफिल किसी जीवंत कर्मयोगी को सलाम करती है, तो वक्त ठहर जाता है और इतिहास खुद मुस्कुराने लगता है। ऐसी ही एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाली घड़ी गवाह बनी 25 जनवरी 2019 की उस धुंधली मगर उजली शाम की। नालंदा जिले के दिल, बिहारशरीफ के आशीर्वाद सेवा सदन का सभागार केवल एक हॉल नहीं रह गया था, बल्कि वह कृतज्ञता और आदर की एक ऐसी पवित्...

बाबा धर्मदास का इतिहास: दुधर्ष संघर्ष और लोक-गाथाएं

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प्रतीकात्मक चित्र भूमिका: संतों का संघर्ष और समय की करवट इतिहास केवल तारीखों और राजा-महाराजाओं के महलों का ब्यौरा नहीं होता; इतिहास वास्तव में उन महापुरुषों के पसीने और रक्त से लिखी गई गाथा है, जिन्होंने समाज की रक्षा के लिए अपनी सुख-सुविधाओं की आहुति दे दी। संत का हृदय मक्खन से भी कोमल होता है, लेकिन जब समाज पर विपदा आती है, जब निरीह और असहाय लोगों पर अत्याचार होता है, तब वही संत वज्र से भी अधिक कठोर हो जाता है। बाबा धर्मदास जी महाराज का जीवन इसी अटूट सत्य का साक्षात उदाहरण है। वे केवल मंदिर के कोने में बैठकर माला जपने वाले साधक नहीं थे; वे तो समाज के उस मोर्चे पर खड़े योद्धा थे, जहाँ धर्म और अधर्म का सीधा टकराव हो रहा था। रामलखन शर्मा जी द्वारा सहेजी गई लोक-गाथाएँ बाबा के जीवन के उस साहसी और जुझारू पहलू को उजागर करती हैं, जिसे जानकर आज भी हमारी रगों में श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति का संचार होने लगता है। पहली लोक-गाथा: मानवता की रक्षा और बौद्धों का सामूहिक संहार बाबा धर्मदास जी के बारे में अनेक गाथाएँ आज भी लोक-कण्ठ में वैसी ही रची-बसी हैं, जैसे दूध में मिश्री घुली होती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी ब...

बाबा धर्मदास का जीवन परिचय और दिव्य इतिहास

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प्रतीकात्मक चित्र भूमिका: राष्ट्र और धर्म की रक्षा में महापुरुषों का आगमन यह सनातन सत्य है कि जब-जब इस धरती पर अज्ञानता का अंधकार गाढ़ा होता है, जब-जब मानवीय मूल्यों का ह्रास होता है और धर्म तथा राष्ट्र अस्मिता पर संकट के बादल मंडराते हैं, तब-तब इस धरा को सही राह दिखाने के लिए दैवीय और विलक्षण शक्तियों का प्रादुर्भाव होता है। इतिहास साक्षी है कि समय की पुकार पर इस भारत भूमि ने ऐसे युगपुरुषों को जन्म दिया है जिन्होंने अपनी आत्मिक ज्योति से न केवल अपने युग को आलोकित किया, बल्कि आने वाली अनगिनत पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक बने। भगवान बुद्ध की करुणा, अर्हंत उपाली का त्याग, सम्राट अशोक का धम्म-संदेश, नारायणी माता की शक्ति, संत कबीर दास का अलख, गुरुनानक देव की रूहानी सीख, संत प्रवर सेन जी महाराज की आत्म-साधना, संत शिरोमणि रविदास की समरसता, और जिवाजी महाले तथा पंच प्यारे भाई साहिब सिंह जी का अदम्य शौर्य—ये सभी इसी दिव्य श्रृंखला की कड़ियाँ हैं। आधुनिक और मध्यकाल में भी लोक-संस्कृति को नया जीवन देने वाले पद्मश्री भिखारी ठाकुर और दबे-कुचले समाज के मसीहा, भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जैसी विभ...